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100 Bimari ek dawa he Neem / लाख दुखों की एक दवा

Million disease one medicine/ لاکھ دکھوں کی ایک دوا نیم

बालों की समस्याओं से राहत

आपकी बहुत मदद कर सकते हैं। नीम का तेल बालों को लंबा करने और डैंड्रफ को दूर करने के लिए भी अच्छा होता है।
स्टेप
• हल्के हाथों से अपनी बालों की जड़ों पर नीम के तेल से मसाज करें।
• इससे आपकी पतले बालों की समस्या भी सुलझ जाएगी।
• डैंड्रफ दूर करने के लिए नीम के पाऊडर में पानी मिलाकर स्कैल्प पर लगाएं। एक घंटे के लिए छोड़ दें फिर शैंपू से धो लें।
अगर आपको नीम की पत्तियां मिलने में दिक्कत होती है तो आप किसी भी आयुर्वेदिक स्टोर पर जाकर नीम का पाऊडर ले सकते हैं। नीम की पत्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं तो पहले उन्हें धो लें।

त्वचा की देखभाल में

नीम के बीज के तेल का उपयोग सामान्यत: हर्बल उत्पादों में घटक के रूप में किया जाता है। यह लाभकारी तेल साबुन, क्रीम, लोशन, फेस वॉश आदि में मिलता है। क्योंकि यह एक प्राकृतिक एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक है अत: इसका उपयोग त्वचा से संबंधित विभिन्न समस्याओं जैसे सोरेसिस, एक्जिमा, मुहांसे, रिंगवर्म आदि में किया जाता है। नीम के बीज के तेल से आपकी त्वचा नर्म, चिकनी और चमकदार बनती है। इससे त्वचा स्वस्थ और दाग धब्बों से मुक्त रहती है।

बालों की देखभाल

सामान्यत: हर्बल शैंपू में नीम का तेल होता है। नीम तेल युक्त शैंपू का बालों पर शानदार प्रभाव पड़ता है। नीम युक्त शैपू से बाल धोने पर न वे केवल सुंदर दिखते हैं बल्कि यह बालों के झड़ने और समय से पहले बालों के सफ़ेद होने जैसी समस्याओं को दूर रखता है। स्वस्थ और चमकीले बालों के लिए आप नीम के तेल का उपयोग कर सकते हैं।
आँखों और कानों के लिए मरहम के रूप में

नीम के बीज के सत्व का उपयोग आँखों और कानों के लिए मरहम और ड्रॉप बनाने में किया जाता है। इनमें एंटीबैक्टीरियल गुण होता है जो आँखों और कानों में संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में सहायक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार आँखों और कानों में कीटाणुओं और जीवाणुओं के कारण होने वाले संक्रमण के उपचार में नीम के बीज के सत्व से बने ड्रॉप्स और ऑइंटमेंट का उपयोग बहुत प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।
मलेरिया की रोकथाम में सहायक

आयुर्वेधिक औषधि प्रणाली में मलेरिया के प्रभावी उपचार में नीम का उपयोग किया जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार नीम के पिसे हुए बीजों की दुर्गन्ध मच्छरों को दूर रखती है तथा उन्हें अंडे देने से भी रोकती है। नीम के वृक्ष के बीजों से मिलने वाले नीम के शुद्ध तेल का उपयोग मच्छरों को अंडे देने से रोकता है जिससे मलेरिया की रोकथाम होती है।

जन्म नियंत्रण

यह पाया गया है कि महिलाओं तथा पुरुषों दोनों में जन्म नियंत्रण के लिए नीम प्रभावी रूप से उपयोगी है। महिलाओं में गर्भावस्था को रोकने के लिए नीम के तेल का उपयोग लुब्रीकेंट के रूप में किया जा सकता है। यदि आप परिवार प्रारंभ करने की योजना बना रहे हैं तो निश्चित ही आपको नीम का उपयोग नहीं करना चाहिए। गर्भवती माओं को भी इससे दूर रहना चाहिए।

पिस्सुओं को दूर करने में सहायक

नीम का तेल आपके पालतू जानवर के लिए भी उपयोगी है। यदि आपका कुत्ता या बिल्ली पिस्सुओं से संक्रमित है तो उनके बालों पर नीम का तेल लगायें। इससे आपके पालतू जानवर के बाल सीस्थ और चमकीले हो जायेंगे। इस उपचार का लाभ यह होता है कि इससे जानवर को कोई नुकसान नहीं होता अत: आपको अपने पालतू जानवर के स्वास्थ्य या सुरक्षा के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
मिट्टी को पोषक बनाता है

नीम के बीजों से तेल निकालने के बाद जो अवशेष बचता है उससे नीम की टिकिया बनाई जाती है। मिट्टी को पोषक बनाने के लिए इसे जैविक पदार्थ के रूप में मिट्टी में मिलाया जाता है। यह मिट्टी में नाइट्रोजन को कम होने से रोकता है क्योंकि यह नाइट्रीकरण को रोकता है।
कीड़ों को दूर रखने में सहायक

नीम के बीज का तेल एक उत्कृष्ट कीट निरोधक है। माली बग़ीचे में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के कीड़ों जैसे इल्ली, घुन, टिड्डी, झींगुर आदि को पेड़ पौधों से दूर रखने के लिए इसका उपयोग करते हैं। आप घर पर भी चींटी, दीमक, तिलचट्टे, मक्खी, खटमल आदि को दूर रखने के लिए नीम के तेल का उपयोग कर सकते हैं।

कीटनाशक

ऑर्गेनिक खेती करने वाले कृषक कीटों के संक्रमण को रोकने के लिए नीम के बीज के तेल का उपयोग करते हैं। नीम के पिसे हुए बीजों को रात भर पानी में भिगाकर रखा जाता है तथा इस पानी का फसलों पर छिडकाव किया जाता है। यह छिडकाव अण्डों को निष्क्रिय करता है, कीटों को दूर रखता है तथा उन्हें मारने में सहायक होता है। एक बार छिडकाव होने पर भूख के कारण कीड़े कुछ ही दिनों में मर जाते हैं। नीम के बीज से बने कीटनाशक उत्कृष्ट होते हैं क्योंकि ये रसायन मुक्त होते हैं।

अन्य बीमारियों के उपचार में सहायक

नीम के बड़े पत्तों और बीजों से चाय बनाई जा सकती है। हालाँकि ये बहुत अधिक कडवे होते हैं तथा इन्हें पीना बहुत मुश्किल होता है परन्तु यह स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होती है। यह किडनी, मूत्राशय और प्रोस्टेट से संबंधित बीमारियों के उपचार में बहुत प्रभावी है। यह उपचार दशकों से चला आ रहा है परंतु आज भी लोकप्रिय है।

एक्‍जिमा

नीम का एंटीसेप्‍टिक गुणों से भरा है जो एक्‍जिमा में होने वाली सूजन और खुजली को कम करता है। यह सूखी और क्षतिग्रस्त त्वचा को ठीक करता है।

मलेरिया

नीम का तेल रोग के प्रभावित क्षेत्रो में लार्वा के जन्म की गिनती को कम करने में असरदार काम करता है। नीम के तेल का प्रयोग मलेरिया को नियंत्रित करने के लिए एक अनुकूल तरीका है।

दांतों के लिये

नीम का तेल मसूड़े की सुजन और दांत की सडन का दूर करने का काम करता है।

जीवाणु रहित गुण

नीम का तेल दवाओं में भी किया जाता है। घाव और खरोच को ठीक करने के लिये इसका तेल उपयोग करें क्योंकि यह विषाक्त रहित है, जो संक्रमण का इलाज़ करता है।

त्वचा संक्रमण के लिए

एथलीट फूट, नाख़ून कवक जैसे त्वचा रोग फंगल संक्रमण के कारण होते है। नीम में पाए जाने वाले दो योगिक गेदुनिन और निबिडोल त्वचा में पाए जाने वाले फफूंद को समाप्त करते है और संक्रमण को कम करते है।

रुसी दूर करे

नीम का तेल नियमित लगाने से सिर की खुशकी दूर होगी जिससे रूसी की समस्‍या ठीक हो जाएगी। इसके तेल से बाल दो मुंहे भी नहीं होते।

नीम और हल्‍दी

ताजी नीम की पत्‍तियों को बारीक पीस लीजिये, उसमें हल्‍दी पाउडर मिलाइये और इस फेस पैक को twenty मिनट के लिये चेहरे पर लगाइये। फिर ठंडे पानी से धो लीजिये। अगर नीम की पत्‍तियां न मिले तो नीम पाउडर को ही गरम पानी में मिला कर पेस्‍ट बना लें

नीम पत्‍ती और नींबू

नीम की पत्‍ती को पीसिये, उसमें कुछ बूंद नींबू के रस की डालिये। इसे चेहरे और गर्दन पर लगाइये और fifteen मिनट के बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लीजिये। यह फेस पैक ऑयली स्‍किन वालों के लिये बहुत अच्‍छा है।

नीम, चंदन पाउडर और गुलाबजल

यह सारी सामग्रियों को मिला कर पेस्‍ट तैयार करें। चेहरे पर आधा घंटे के लिये लगा रहने दे और बाद में गरम पानी से चेहरा धो लें। अगर आपको पिंपल की समस्‍या अधिक है तो, इसे हफ्ते में 3-4 बार प्रयोग करें

नीम स्‍प्रे

समय न होने की वजह से पैक लगाने का टाइम नहीं मिलता तो, ऐसे में कुछ नीम की पत्‍तियों को साफ पानी में या फिर गुलाबजल में रातभर भिगो कर रख दें और इसे किसी बोतल में भर कर हफ्ते भर प्रयोग करें। इसे फ्रिज में ठंडा कर लें। अपने थकान भरे चेहरे पर इसे स्‍प्रे करें।

नीम, बेसन, दही

नीम पाउडर को बेसन और दही के साथ मिलाएं और चेहरे तथा गर्दन पर लगाएं। twenty मिनट के बाद चेहरा धो लें। यह पैक ड्राई स्‍किन वालों के लिये अच्‍छा है, यह स्‍किन को अंदर तक नम करता है और पिंपल से भी राहत दिलाता है।

संक्रमण से बचाये

करीब दो लीटर पानी में 50-60 नीम की पत्तियां डालकर उबालिये। उबालते वक्‍त जब पानी का रंग हरा हो जाय, तो उस पानी बोतल में छान कर रख लें। नहाते समय एक बाल्‍टी पानी में a hundred मिली नीम का यह पानी डालें। यह पानी आपको संक्रमण, मुंहासों और वाइटहेड्स से छुटकारा दिलायेगा।

नीम का तेल गुणों की मेल

नीम का तेल कई साबुनों, नहाने के पाउडर, शैंपू, लोशन, टूथपेस्‍ट और क्रीम में प्रयोग किया जाता है। यह त्‍वचा की शुद्धि करता है।

फेस पैक निखारे रूप

10 नीम की पत्‍तियों को संतरे के छिलकों के साथ पानी में उबालिये। इसका पेस्‍ट बना कर उसमें शहद, दही और सोया मिल्‍क मिलाकर एक पेस्‍ट तैयार करें। हफ्ते में तीन बार इसे अपने चेहरे पर लगाने से आपको मिलेगा एक निखरता हुआ चेहरा। साथ ही आपके चेहरे से पिंपल, वाइटहेड्स, ब्‍लैकहेड्स और पोर्स छोटे हो जाएंगे।

हेयर कंडीशनर संवारे बालों की खूबसूरती

नीम एक बेहतरीन हेयर कंडीशनर भी है। पानी में उबालकर और शहद मिलाकर तैयार किया गया नीम का पेस्‍ट बालों में लगाने से रूसी की समस्‍या खत्‍म होती है। साथ ही आपके बाल मुलायम भी बनते हैं।

रूप निखारे स्‍किन टोनर

आपको महंगे-महंगे ब्‍यूटी प्रॉडक्‍ट्स पर पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं। अगर आपके पास नीम की पत्तियां हैं, तो आपका काम काफी आसान हो जाता है। रात एक कॉटन बॉल को नीम के पानी में डुबोकर उससे अपना चेहरा साफ करें। इससे आपको मुंहासों, झाइयां और ब्‍लैकहेड्स से निजात मिलेगी। एक अकेला नीम आपको इतनी सारी ब्‍यूटी प्रॉब्‍लम्‍स से निजात दिला सकता है।

पानी शुद्ध करे

नीम की पत्तियों को उबालिये (दो लीटर पानी में लगभग fifty पत्ते)। उसके बाद जब पानी का रंग हरा हो जाए तब उस पानी को बोतल में छान कर रख लें। अपने नहाने के वक्‍त पानी में a hundred मिलीलीटर इस नीम के पानी को डालें, जिससे संक्रमण, मुँहासे और वाइटहेड्स से छुटकारा मिले।

दर्द नाषक

यदि शरीर पर कहीं कट, छिल या फोड़ा हो गया हो या फिर सिरदर्द, मोच, कान का दर्द, बुखार आदि हो गया हो तो नीम का पेस्‍ट लगाइये और दर्द से छुटकारा पाइये।

नीम जड़ का औषधीय गुण

नीम की छाल और उसके जड़ों की औषधीय गुण की वजह से बालों में जूं और रूसी की समस्‍या से निजात पाया जा सकता है। आप चाहें तो नीम का पाउडर भी इस्‍तमाल कर सकते हैं।

पिंपल दूर करें

नीम के पत्तों और संतरे के छिलकों को पानी में उबालकर इस पानी को ठंडा करके इससे मुंह धोने पर पिंपल दूर होते हैं. नीम के ऐसे ही कई और फायदे हैं जिन्हें आप पढ़ कर इस्तेमाल करेंगे तो आपके सभी दाग, धब्बे, कील, मुंहासे और झुर्रियां दूर हो सकती हैं.

त्वचा में नमी पहुंचाए

आप नीम के पानी को शहद या कच्चे दूध के साथ मिक्स कर के चेहरे पर लगा सकते हैं. नीम का पानी रूखापन कम करता है और चेहरे में नमी लाता है.

चेहरे के काले दाग हटाए

चेहरे की भीतरी त्वचा में समाए काले रंग के दाग को नीम का पानी गायब कर देता है.

चेहरे पर चमक लाए

नीम के पानी में एंटी माइक्रोबियल फार्मूला होता है जिससे त्वचा से संबंधी कई सारे रोग जैसे, मुंहासे और उसके दाग, रूखापन और झुर्रियां दूर हेाती हैं. जब चेहरे से सारे दाग-धब्बे दूर हो जाएंगे तो चेहरा चमकदार दिखाई देना शुरू हो जाएगा.

त्वचा गोरी करे

नीम का पानी आपके चेहरे को सूरज की घातक किरणों से होने वाले नुकसान से बचाता है. यह त्वचा के अंदर बनने वाले मेलेनिन और तेल को अधिक बनने से रोकता है

ब्लैक हेड्स हटाए

नीम का पानी एक डीप क्लींजर की तरह भी काम करता है क्योंकि इसमें एंटी बैक्टीरियल तत्व होता है. यह त्वचा के अंदर में समाई गंदगी को पूरी तरह से निकाल देता है.

आंखों के काले घेरे हटाए

नीम के पानी के साथ चंदन का पॉउडर मिक्स कर के आंखों के काले घेरे पर लगाएं. इससे ब्लड सकरुलेशन बढ़ेगा और कालापन मिटेगा.

नीम में एंटी इंफ्लेमेट्री तत्‍व

नीम में एंटी इंफ्लेमेट्री तत्‍व पाए जाते हैं, नीम का अर्क पिंपल और एक्‍ने से मुक्‍ती दिलाने के लिये बहुत अच्‍छा माना जाता है। इसके अलावा नीम जूस शरीर की रंगत निखारने में भी असरदार है।

नीम जूस पीने से

नीम जूस पीने से, शरीर की गंदगी निकल जाती है। जिससे बालों की क्‍वालिटी, त्‍वचा की कामुक्‍ता और डायजेशन अच्‍छा हो जाता है।

नीम जूस मधुमेह रोगियों के लिये

इसके अलावा नीम जूस मधुमेह रोगियों के लिये भी फायदेमंद है। अगर आप रोजाना नीम जूस पिएंगे तो आपका ब्‍लड़ शुगर लेवल बिल्‍कुल कंट्रोल में हो जाएगा।

शरीर पर चिकन पॉक्‍स के निशान

शरीर पर चिकन पॉक्‍स के निशान को साफ करने के लिये, नीम के रस से मसाज करें। इसके अलावा त्‍वचा सं‍बधि रोग, जैसे एक्‍जिमा और स्‍मॉल पॉक्‍स भी इसके रस पीने से दूर हो जाते हैं।

नीम एक रक्त-शोधक

नीम एक रक्त-शोधक औषधि है, यह बुरे कैलेस्ट्रोल को कम या नष्ट करता है। नीम का महीने में ten दिन तक सेवन करते रहने से हार्ट अटैक की बीमारी दूर हो सकती है।

मसूड़ों से खून आने और पायरिया हो

मसूड़ों से खून आने और पायरिया होने पर नीम के तने की भीतरी छाल या पत्तों को पानी में औंटकर कुल्ला करने से लाभ होता है। इससे मसूड़े और दाँत मजबूत होते हैं। नीम के फूलों का काढ़ा बनाकर पीने से भी इसमें लाभ होता है। नीम का दातुन नित्य करने से दांतों के अन्दर पाये जाने वाले कीटाणु नष्ट होते हैं। दाँत चमकीला एवं मसूड़े मजबूत व निरोग होते हैं। इससे चित्त प्रसन्न रहता है।

नीम का जूस कैसे पिएं?

1. नीम का रस बहुत कडुआ होता है, जिसे पीना बहुत मुश्‍किल होता है। अगर आपको इसके फायदे चाहिये तो इसे एक ग्‍लास में डाल कर इसको दवा समझ कर पूरा एक साथ पी लें। इसके अलावा ये भी देखिये की नीम के रस को और किस-किसी प्रकार से पिया जा सकता है।

2. नीम के रस में थोड़ा मसाला डाल दें जिससे उसमें स्‍वाद आ जाए। इसको पीने से पहले उसमें नमक या काली मिर्च और या फिर दोनों ही डाल दें।

3. कई लोगो को नीम की महक अच्‍छी नहीं लगती। इसलिये जब रस निकाल लें तब उसको फ्रिज में 15-20 मिनट के लिये रखें या फिर उसमें बर्फ के कुछ क्‍यूब डाल दें और फिर पिएं। लेकिन सबसे अच्‍छा होगा कि नीम के रस को निकाल कर तुरंत ही पी लिया जाए। इसको thirty मिनट से ज्‍यादा स्‍टोर कर के नहीं रखना चाहिये।

4. नीक का रस पीने से पहले अपनी नाक को दबा लें, इससे जूस को पीने में आसानी होगी। अगर आपको नीम जूस का पूरा फायदा उठाना है, तो इसमें चीनी बिल्‍कुल भी न मिलाएं।

5. नीम का रस हमेशा सुबह-सुबह पिएं। इसकी कडुआहट को कम करने के‍ लिये इसमें नमक मिलाएं और हल्‍का सा पानी भी।

आयुर्वेद के अनुसार नीम

आयुर्वेद के अनुसार नीम हल्का, कटु−तिक्त, कषाय शीतल होता है जो तीन प्रकार के दोषों अर्थात पात, पित्त और कफ संबंधी विकारों का नाश करता है। यह कब्ज मलेरिया, पीलिया, कुष्ठ प्रदर, सिर दर्द, दांत संबंधी रोगों और त्वचा रोगों में गुणकारी होता है। यह बहुत ही अच्छा रक्तशोधक तथा कीटाणुनाशक होता है।

यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार नीम

यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार नीम की तासीर बहुत गर्म तथा खुश्क होती है। उपदंश और कुष्ठ के उपचार के लिए इसे सर्वोत्तम औषधि माना गया है। होम्योपैथी के अनुसार पुराने जीर्ण रोगों के लिए सबसे अच्छी दवा नीम है।

नीम का तेल

नीम का तेल जोकि गंध व स्वाद में कड़वा होता है प्रथम श्रेणी की कीटाणुनाशक होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह व्रण शोधक, दुर्गन्धनाशक, वातहर तथा शीतपित्त, कुष्ठ तथा पायरिया जैसे रोगों में बहुत लाभकारी होता है। नीम एक अच्छा गर्भनिरोधक भी माना जाता है।

बवासीर जैसे कष्टकारी रोग के इलाज के लिए नीम

बवासीर जैसे कष्टकारी रोग के इलाज के लिए नीम तथा कनेर के पत्ते बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को प्रभावित भाग पर लगाने से कष्ट कम होता है। नीम के पत्तों तथा मूंग दाल को मिलाकर पीस कर बिना मसाले डाले तलकर खाने से भी इस रोग में आराम मिलता है। इस दौरान रोगी के भोजन में छाछ व चावल का समावेश भी करें। मसालों का प्रयोग बहुत कम यदि सम्भव हो तो बिल्कुल न करें। रोज सुबह निबोरियों का सेवन करने से भी आराम मिलता है। प्रभावित अंग पर नीम का तेल भी लगाया जा सकता है।

पथरी की समस्या से निपटने के लिए

पथरी की समस्या से निपटने के लिए लगभग a hundred and fifty ग्राम नीम की पत्तियों को a pair of लीटर पानी में पीसकर उबालें और पी लें इससे पथरी निकल सकती है। पथरी यदि गुर्दे में है तो नीम के पत्तों की राख की लगभग a pair of ग्राम मात्रा प्रतिदिन पानी के साथ लेने से लाभ मिलता है।

नीम पेस्‍ट

नीम को पानी में उबालिये, छानिये और पीस लीजिये। इस पेस्‍ट को चेहरे पर 5-10 मिनट के लिये लगाइये और सूखने दीजिये और ठंडे पानी से धो लीजिये। इससे दाग-धब्‍बे समाप्‍त होगे और खुजली खतम होगी।

नीम, नींबू और रोज़ वॉटर

यह फेस पैक पिंपल को ठीक करने में असरदार होता है। एक कटोरे में नीम पाउडर लीजिये, फिर उसमें रोज वॉटर और नींबू का रस मिलाइये। इसे लगाने से केवल दो दिन में आपका पिंपल ठीक हो जाएगा।

नीम और नींबू रस

नीम की कुछ पत्‍तियों को पीस लें, उसमें नींबू का रस मलाएं और चेहरे तथा गर्दन पर लगाएं। fifteen मिनट बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें। यह पैक ऑयली चेहरे के लिये अच्‍छा है और डेड स्‍किन को साफ करता है।

नीम और नींबू रस

नीम की कुछ पत्‍तियों को पीस लें, उसमें नींबू का रस मलाएं और चेहरे तथा गर्दन पर लगाएं। fifteen मिनट बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें। यह पैक ऑयली चेहरे के लिये अच्‍छा है और डेड स्‍किन को साफ करता है।

नीम, बेसन और दही

यदि चेहरा ड्राई रहता है तो एक कटोरे में बेसन और दही को मिक्‍स करें। इसमें नीम की कुछ पत्‍तियों को पीस कर डालें। इस पैक को चेहरे और गर्दन पर लगाएं। इससे चेहरे में नमी आएगी और चेहरा ग्‍लो करने लगेगा।

नीम और दूध

साफ, चमकती और फ्रेश स्‍किन चाहिये तो नीम पाउडर और कुछ बूंद दूध की मिलाएं। यदि आप चाहें तो इसमें नींबू की कुछ बूंद भी मिला सकते हैं। इसे चेहरे पर लगाएं और ठंडे पानी से धो लें।

नीम, तुलसी और शहद

तुलसी और नीम से चेहरे के दाग, पिंपल और त्‍वचा के अन्‍य रोग दूर होते हैं और शहद से त्‍वचा टाइट होती है। इन तीनों को मिलाइये और चेहरे पर सूखने तक लगाइये।

एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व

नीम के पानी (पानी में नीम के पत्तों को डालकर गरम करना) में कई एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व होते हैं। यह बढ़ते-घटते टेम्परेचर की वजह से स्किन पर होने वाली इंफ्लेशन (सूजन और जलन) को दूर रखने में मदद करता है। इंफ्लेमेटरी बीमारियों में अर्थराइटिस, हेपाटाइटिस, अल्ज़ाइमर, अस्थमा आदि रोग आते हैं।

एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व

नीम के पानी में अच्छी मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व होते हैं। यह पीने या इसके गरारे करने से मुंह में होने वाली सारी बीमारियां दूर होती हैं। इसके साथ ही यह डाइजेशन सिस्टम भी ठीक रखता है। शरीर से सारे टॉक्सिन बाहर निकाल देता है। पेट की गैस, अल्सर व पेट की अन्य समस्याओं के साथ टीबी व यूरिन इंफेक्शन होने पर नीम की पत्तियों को खाली पेट चबाने से आराम मिलता है।

एंटी-एंके तत्व

नीम एंटी-बैक्टीरियल तत्वों से भरा हुआ है। इन्हीं तत्वों की वजह से यह स्किन से एंकेज़ को दूर रखता है। यह चेहरे से काले सूखे मुंहासों को खत्म कर देता है। इसीलिए इसे दूध या शहद या फिर फेस पैक में डालकर लगाना चाहिए।

एंटी-एजिंग तत्व

नीम में पाए जाने वाले न्यूट्रीएंट्स स्किन को क्लिन और टॉक्सिन फ्री रखते हैं। यह स्किन को हमेशा साफ और पिंपल, रिंकल से दूर रखने में मदद करता है। जिससे स्किन खूबसूरत और खिली हुई लगती है। साथ ही यह उन टॉक्सिन औऱ जर्म्स को भी दूर रखता है जो स्किन को बूढ़ा करने के जिम्मेदार होते हैं।

स्किन को टाइट बनाए

नीम स्किन को टाइट और टोन करता है। यह आमतौर पर स्किन पर होने वाले क्रैक्स और फ्रेकल्स (चित्ती) को भरता है। नीम का पानी स्किन पर आई झुर्रियों को हटा उसे टोन करता है। नीम की पत्ती के पाउडर और पिसी हुई गुलाब की पंखुड़ी को नींबू के रस के साथ मिलाकर लगाने से स्किन में ग्लो आता है और स्किन टाइट होती है।

ब्लैक स्पॉट कम करे

फेस पर होने वाली सारी परेशानियों का इलाज है नीम। यह स्किन पर होने वाले ब्लैक स्पॉट और ब्लैक हेड्स के लिए रामबाण इलाज है। इसे फेस पैक में मिलाकर लगाने या इसके पानी से फेस वॉश करने से ब्लैक स्पॉट आसानी से कम हो जाते हैं।

बालों को बनाए डैंड्रफ फ्री

नीम की पत्तियां एंटी-बायोटिक, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-एलर्जिक होती हैं। इसी कारण यह सिर और बालों में होने वाली तकलीफों को भी दूर करता है। इसके लिए नीम की सूखी पत्तियों को पीसकर मेहंदी, आंवला, रीठा, शिकाकाई में मिलाकर बालों में एक घंटा लगाकर धोने से बाल काले व मुलायम होते हैं और डेंड्रफ भी दूर होता है

संक्रमण से बचाएगा नीम

गर्मियों में इन्फेक्‍शन की वजह से त्‍वचा संबंधी परेशानियां ज्‍यादा होती हैं, जैसे खुजली, खराश आदि। इसके लिए नीम का लेप फायदेमंद रहता है। यह सभी प्रकार के चर्म रोगों के निवारण में सहायक है।

चर्म रोगों से बचाव

नीम की पत्तियों को पानी में उबाल उस पानी से नहाने से चर्म विकार दूर होते हैं और ये खासतौर से चेचक के उपचार में सहायक है और उसके विषाणु को फैलने न देने में सहायक है।

बैक्टीरिया से लड़ता नीम

दुनिया बैक्टीरिया से भरी पड़ी है। हमारा शरीर बैक्टीरिया से भरा हुआ है। एक सामान्य आकार के शरीर में लगभग दस खरब कोशिकाएँ होती हैं और सौ खरब से भी ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं। आप एक हैं, तो वे दस हैं। आपके भीतर इतने सारे जीव हैं कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते। इनमें से ज्यादातर बैक्टीरिया हमारे लिए फायदेमंद होते हैं। इनके बिना हम जिंदा नहीं रह सकते, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो हमारे लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। अगर आप नीम का सेवन करते हैं, तो वह हानिकारक बैक्टीरिया को आपकी आंतों में ही नष्ट कर देता है।

आपके शरीर के भीतर जरूरत से ज्यादा बैक्टीरिया नहीं होने चाहिए। अगर हानिकारक बैक्टीरिया की तादाद ज्यादा हो गई तो आप बुझे-बुझे से रहेंगे, क्योंकि आपकी बहुत-सी ऊर्जा उनसे निपटने में नष्ट हो जाएगी। नीम का तरह-तरह से इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया के साथ निपटने में आपके शरीर की ऊर्जा खर्च नहीं होती।

आप नहाने से पहले अपने बदन पर नीम का लेप लगा कर कुछ वक्त तक सूखने दें, फिर उसको पानी से धो डालें। सिर्फ इतने से ही आपका बदन अच्छी तरह से साफ हो सकता है – आपके बदन पर के सारे बैक्टीरिया नष्ट हो जाएंगे। या फिर नीम के कुछ पत्तों को पानी में डाल कर रात भर छोड़ दें और फिर सुबह उस पानी से नहा लें।

एलर्जी के लिए नीम

नीम के पत्तों को पीस कर पेस्ट बना लें, उसकी छोटी-सी गोली बना कर सुबह-सुबह खाली पेट शहद में डुबा कर निगल लें। उसके एक घंटे बाद तक कुछ भी न खाएं, जिससे नीम ठीक तरह से आपके सिस्टम से गुजर सके। यह हर प्रकार की एलर्जी – त्वचा की, किसी भोजन से होनेवाली, या किसी और तरह की – में फायदा करता है। आप सारी जिंदगी यह ले सकते हैं, इससे कोई नुकसान नहीं होगा। नीम के छोटे-छोटे कोमल पत्ते थोड़े कम कड़वे होते हैं, वैसे किसी भी तरह के ताजा, हरे पत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

एलर्जी के लिए नीम

नीम के पत्तों को पीस कर पेस्ट बना लें, उसकी छोटी-सी गोली बना कर सुबह-सुबह खाली पेट शहद में डुबा कर निगल लें। उसके एक घंटे बाद तक कुछ भी न खाएं, जिससे नीम ठीक तरह से आपके सिस्टम से गुजर सके। यह हर प्रकार की एलर्जी – त्वचा की, किसी भोजन से होनेवाली, या किसी और तरह की – में फायदा करता है। आप सारी जिंदगी यह ले सकते हैं, इससे कोई नुकसान नहीं होगा। नीम के छोटे-छोटे कोमल पत्ते थोड़े कम कड़वे होते हैं, वैसे किसी भी तरह के ताजा, हरे पत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

बीमारियों के लिए नीम

नीम के बहुत-से अविश्वसनीय लाभ हैं, उनमें से सबसे खास है – यह कैंसर-कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। हर किसी के शरीर में कैंसर वाली कोशिकाएं होती हैं, लेकिन वे एक जगह नहीं होतीं, हर जगह बिखरी होती हैं। किसी वजह से अगर आपके शरीर में कुछ खास हालात बन जाते हैं, तो ये कोशिकाएं एकजुट हो जाती हैं। छोटे-मोटे जुर्म की तुलना में संगठित अपराध गंभीर समस्या है, है कि नहीं? हर कस्बे-शहर में हर कहीं छोटे-मोटे मुजरिम होते ही हैं। यहां-वहां वे जेब काटने जैसे छोटे-मोटे जुर्म करते हैं, यह कोई बड़ी समस्या नहीं है। लेकिन किसी शहर में अगर ऐसे पचास जेबकतरे एकजुट हो कर जुर्म करने लगें, तो अचानक उस शहर का पूरा माहौल ही बदल जाएगा। फिर हालत ये हो जाएगी कि आपका बाहर सड़क पर निकलना खतरे से खाली नहीं होगा। शरीर में बस ऐसा ही हो रहा है। कैंसर वाली कोशिकाएं शरीर में इधर-उधर घूम रही हैं। अगर वे अकेले ही मस्ती में घूम रही हैं, तो कोई दिक्कत नहीं। पर वे सब एक जगह इकट्ठा हो कर उधम मचाने लगें, तो समस्या खड़ी हो जाएगी। हमें बस इनको तोड़ना होगा और इससे पहले कि वे एकजुट हो सकें, यहां-वहां इनमें से कुछ को मारना होगा। अगर आप हर दिन नीम का सेवन करें तो ऐसा हो सकता है; इससे कैंसर वाली कोशिकाओं की तादाद एक सीमा के अंदर रहती है, ताकि वे हमारी प्रणाली पर हल्ला बोलने के लिए एकजुट न हो सकें। इसलिए नीम का सेवन बहुत लाभदायक है।

नीम में ऐसी भी क्षमता है कि अगर आपकी रक्त धमनियों(आर्टरी) में कहीं कुछ जमना शुरु हो गया हो तो ये उसको साफ कर सकती है। मधुमेह(डायबिटीज) के रोगियों के लिए भी हर दिन नीम की एक छोटी-सी गोली खाना बहुत फायदेमंद होता है। यह उनके अंदर इंसुलिन पैदा होने की क्रिया में तेजी लाता है।

नीम के फायदे

नीम का उपयोग कई तरीकों से किया जाता है। यह एक बेहतरीन प्राकृतिक प्रदार्थ है जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। इसके उपयोग निम्न हैं

बालझड़ (Baldness)

यदि किसी कारण सर झरने लगे, परन्तु अभी अवस्था बिगड़ी न हो तो नीम और बेरी के पत्तो को पानी में उबालकर बालो को धोना चाहिए। इससे झड़ना रुक जाता है, कालीमा कायम रहती है और थोड़े थोरे ही दिनों में बाल खूब लम्बे होने लगते है। इससे जुए भी मर जाती है।

नेत्र खुजली (Itching)

नीम के पत्ते छाया में सुखा ले और किसी बर्तन में डाल कर जलाये। ज्योही पत्ते जल जाये, बर्तन का मुँह ढक दे। बर्तन ठण्डा होने पर पत्ते निकाल कर सुरमे तरह पीस ले। अब इस रख में नीबू का ताजा रास डालकर छह घंटे तक खरल करे और खुश्क शीशी में रखे। रोजाना प्रातः व सायं सलाई द्धारा सुरमे के सामान उपयोग करे

आँख का अंजन (Home Remedies for fretful Eyes)

नीम के फूल छाँव में खुश्क कर बराबर वजन कलमी शोर मिलाकर बारीक़ पीस ले और कपरछन करे। अनजान के रूप में रात्रि को सोते समय सलाई द्धारा उपयोग करे, नेत्र-ज्योति बढ़ता है।

कान बहना (Neem in Ear Problems)

नीम का तेल गर्म कर इसमे सोलहवाँ भाग माँ डाले, जब पिघल जाये तो आच पर से उतार कर इसमें आठवाँ भाग चूर्ण फिटकरी (खील) मिलाकर सुरक्षित रखे। यदि कान बहना बन्द न होता हो तो इस दवा को आवश्य आजमाए।

कान में घाव (Neem in Ear Problems)

यदि कान में घाव हो जाये तो बड़ी कठिनाई से ठीक होता है। लिए निम्न नुस्ख अत्यंत लाभप्रद सिद्ध हुआ है – नीम का रस तीन माशे, शुद्ध मधु मशो। दोनों मिश्रित करे, तथा थोड़ा गरम कर के मधु के 2-4 बूंद टपकाये। कुछ ही दिन में घाव ठीक होकर स्वस्थ लाभ होगा।

नजला – जुखाम (Uses of Azadirachta indica in Common Cold)

नीम के पत्ते एक टोला, काली मिर्च छह हसो- दोनों नीम के डंडे से कुटे और नीम के एक एक पत्ते से गोलिया बनाये। इस गोलिया को छाव में सुख कर सीसी में कर के रखना चाहिए। तीन-चार गोलिया प्रातः व सय कुनकुने पानी के साथ लेना चाहिए, नजला-जुखाम के लिए उत्तम है। नीम की निम्बैली एक तोला, लाहैरी नमक एक तोला, खिल फिटकरी एक तोला- तीनो बारीक़ से पीस कर मंजन रूप में दांत पर मलिये, दांत पीड़ा के लिए बिसेसकर लाभदायक है। दांत मोती के सामान चमक उठते है।

पुराने दस्त (Home Remedies of Diarrhea)

नीम के बीज की गिरी एक माशा में थोड़ी चीनी मिलकर उपयोग करने से पुराने दस्त बंद होते है। आहार केवल चावल ही रखे।

बारी का ज्वर

नीम की भीतरी नरम छाल छाव में खुश्क कर बारीक़ पीस ले और एक एक माशा पानी के साथ दिन में तीन बार उपयोग करे। तीन दिन में ही दवा जादू का काम करती है तथा बारी का ज्वर फिर नही होता। नीम के पंचांग जलाकर बत्तीस गुना पानी डालकर एक घड़े में रखे और नित्य हिलाते रहे। तीन दिन पशचात पानी निथार कर कपरछन करे और लोहे की कड़ाही में डालकर आँच पर रखे। जब सारा जल सुख जाये और नमक जैसा पदार्थ बाकि रह जाये (यह नीम का क्षर है ) तो इसे शीशी में सुरक्षित रख ले। मात्रा- आधी से एक रत्ती तक। सब प्रकार के ज्वर, विशेषकर मलेरिया की अचूक औषधि है दिन में तीन-चार बार उपयोग की जा सकती है।

ज्वर-तोड़

आधा छटांक नीम के हरे पत्ते और दो दाने काली मिर्च-दोनों आधा पाव पानी में घोटकर तथा चन कर पिने से बरी का ज्वर ठीक हो जाता है। यह एक अत्यंत भरोसे की दवा है। नीम के ताजा पत्ते एक तोला, शवेत ओहितकारी छह माशो – दोनों बारीक़ पीस कर पानी द्वारा चने के बराबर गोलियाँ बना ले। नित्य तथा बरी से चढ़ने वाले सब प्रकार के ज्वर ठीक करने में चमत्कारी है।

पुराना ज्वर

इक्कीस नीम के पत्ते और इक्कीस डेन काली मिर्च – दोनों की मलमल के कपड़े में पोटली बाँधकर आधा सेर पानी में उबले। जब पानी चौथाई भाग रह जाये तो उतार कर ठण्डा होने दे। फिर प्रातः व सांय पिलाने से निशचय ही लाभ होगा।

तपेदिक का बढ़िया इलाज

छिलका नीम दो सेर, आवले की जड़ दो सेर, पुराना गुड़ चार सेर, हरड़, आँवला बहेड़ा प्रत्येक आधा सेर, सौफ आधा सेर और सोए आधा सेर और सोए आधा सेर – समस्त सामग्री मजबूत बर्तन में बन्द कर ग्रीष्म ऋतु में पांच शरद ऋतु में बारह दिन तक किसी गर्म स्थान पर – गेहूँ या भूसे में रखे। तत्पशचात दो बोतल अर्क निकले। मात्रा – पहले दिन एक तोला, दूसरे दिन डेढ़ तोला तथा तत्पशचात दो तोला तक रोजाना गुलाब अर्क के साथ पिलाये। यह नुस्खा एक सन्यासी साधु से प्राप्त हुआ है।

गर्मी ज्वर

प्रायः ज्वरो में और विशेषकर गर्मी के ज्वर में प्यास बंद नही होती। ऐसी स्थिति में नीम की पतली टहनियाँ (पत्तो रहित) लेकर पानी में डाले और थोरे देर पसगचत यह पानी रोगी को पिलाये, तुरंत प्यास को आराम होगा, घबराहट दूर होगी और ज्वर में लाभ होगा।

पेट के कीड़े

दो तोले नीम की छाल एक सेर पानी में पकाये, चौथाई भाग पानी रहने पर मलकर छाने और प्रातः व सांय पि लिया करे। इससे पेट कीड़े जाते है और फिर नही होते।

यदि पेट में कीड़े पड़ जाये तो नीम के पत्तो का रस दो-तीन दिन पिलाये, कीड़े मर कर निकल जायेगे। तत्पशचात दो-तीन दिन कलई का बुझा हुआ पानी पिलाये, दोबारा पेट में कीड़े नही पड़ेंगे।

पेट की बीमारी

नीम की 15-20 पत्ती और दस काली मिर्च थोड़े से नमक के साथ पीसकर एक गिलास जल में घोलकर खाली पेट 3-4 दिन तक पी लेने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। नीम के कड़वे रस के कारण आने वाले कम से कम 2-3 वर्ष तक के लिए मुक्ति मिल जाती है।

बवासीर (Remedies of Bawasir)

नीम के बीज बीज गिरी तोला, धरेक के बीज की गिरी एक तोला, धरेक के बीज की गिरी एक तोला, रसौत एक तोला, हरड़ (गुठली रहित) तीन तोला – कूटकर कपरछन करे। छह-छह माशाप्रातः व सांय ठण्डे दूध या पानी के साथ सेवन करे, अवश्य लाभ होगा।

कब्जनाशक गोलियाँ

पांच तोले विशुद्ध रसौत, काली मिर्च दो तोले और नीम के बीज की गिरी पांच तोले – समस्त सामग्री पीसकर नीम के पत्ते के रास में घोट ले अच्छी प्रकार बारीक़ हो जाने पर काबुली चने के बराबर गोलिया बना ले। एक गोली प्रातः ताजा जल से उपयोग करे तथा एक गोली पानी में धिसकर शौच-निवती पर मस्सो में लगाये। लगाते ही बवासीर से छुटकारा मिल जायेगा।

नीम की गिरी एक छटांक,शुद्ध रसौत एक चटक – दिनों अच्छी प्रकार कूटकर मिलाये और जंगली बेर के बराबर गोलियाँ बना ले। एक गोली नित्य प्रातः पानी के साथ एक मास तक निरंतर उपयोग करे, बवसीर में आराम होगा।

पथरी (Remedies of Stone)

नीम के पत्ते जलाकर साधारण विधि से शर तैयार करे – दो-दो माशे ठण्ढे जल से दिन में तीन बार उपयोग करने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी ठीक हो जाती है।

खुजली

नीम की नरम कोपले, ढाई तोला नित्य ठंडाई के रूप में घोटकर पिने से खुजली दूर होती है।

बढ़िया मरहम

रक्त विकार के कारण प्रायः फोड़े-फुंसियाँ निकलती रहती है और कई बार ये इतनि बिगड़ घाव साफ करने के लिए नीम के पत्तो मरहम बनाई जाती है जो कभी असफल नही होती|

नीम से होगा कैंसर का इलाज

औषधीय गुणों के कारण गुणकारी नीम सदियों से भारत में कीट-कृमिनाशी और जीवाणु-विषाणुनाशी के रूप में प्रयोग में लाया जाता रहा है। अब कोलकाता के वैज्ञानिक इसके प्रोटीन का इस्तेमाल करते हुए कैंसर के खिलाफ जंग छेड़ने की तैयारी में जुट गए हैं। चित्तरंजन नेशनल कैंसर इंस्टीच्यूट (सीएनसीआई) के अनुसंधानकर्ताओं की एक टीम ने अपने दो लगातार पर्चो में बताया है कि किस तरह नीम की पत्तियों से संशोधित प्रोटीन चूहों में ट्यूमर के विकास को रोकने में सहायक हुआ है।

कैंसर की कोशिकाओं को सीधे निशाना बनाने के बजाय यह प्रोटीन-नीम लीफ ग्लाइकोप्रोटीन या एनएलजीपी- ट्यूमर के भीतर और रक्त जैसे परिधीय तंत्र में मौजूद प्रतिरक्षण कोशिकाओं (जो कोशिकाएं शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले कारकों से प्रतिरक्षा प्रदान करने के लिए उत्तरदायी होती हैं) को बल प्रदान करता है। प्रतिरक्षण कोशिकाएं आम तौर पर कैंसर कोशिकाओं के साथ ही नुकसान पहुंचाने वाली कोशिकाओं की शत्रु होती हैं। ट्यूमर के विकास के दौरान कैंसर वाली कोशिकाएं अपने विकास और विस्तार के लिए इन प्रतिरक्षक कारकों को अपना दास बना लेती हैं। इसलिए इन जहरीली कोशिकाओं को मारने की जगह प्रतिरक्षक कोशिकाएं उनकी सहायता करने लगती हैं।

एनएलजीपी की खासियत यह है कि यह ट्यूमर के चारों ओर मौजूद कोशिका परिवेश (इसे ट्यूमर सूक्ष्मपारिस्थितिकी कहा जाता है) का सुधार करता है और उन कोशिकाओं को एक सामान्य अवस्था की ओर अग्रसित करता है, जो कैंसर कोशिकाओं की तरह खतरनाक हो रही होती हैं।

सीएनसीआई के इम्यूनोरेग्युलेशन एंड इम्यूनडाइग्नोस्टिक्स विभाग के अध्यक्ष रथिंद्रनाथ बराल ने कहा, हमारे हाल के अध्ययन में हमने पाया है कि एनएलजीपी में ट्यूमर कोशिकाएं और ट्यूमर से संबद्ध गैर परिवर्तित कोशिकाएं जो ट्यूमर के विकास में सहायक होती हैं, से युक्त ट्यूमर की सूक्ष्म-पारिस्थितिकी को सामान्य करने की शक्ति मौजूद है। मूल रूप से एनएलजीपी ट्यूमर की सूक्ष्मपारिस्थतिकी में इस तरह से बदलाव लाता है, जिससे उसका आगे का विकास बाधित हो जाता है।

पत्तियों की महत्ता

पत्तियों की महत्ता के बारे में एक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में लोगों से पूछने लगे तो कुनूर केन्यूट्रीजन अनुसंधान केंद्र के निदेशक डा. एक्राइड ने बताया कि हमने अपनी प्रयोगशाला में नीम की हरी पत्तियों का परीक्षण किया तो ज्ञात हुआ कि अनेकानेक हरी पत्तियों की अपेक्षा नीम की पत्तियों में पोषक तत्व अत्यधिक मात्राा में मिलते है। पकी हुई पत्तियों और कोंपलों में कैल्शियम, प्रोटीन, लोहा और विटामिन एक पर्याप्त मात्राा में उपलब्ध होती है। इस दृष्टि से चौलाई, पालक, धनिया आदि कई तरकारियों से नीम की पत्तियाँ श्रेष्ठतम मानी जाती है।

नीम के बीज कडवे और कपफ निस्तारक

यूनानी चिकित्सकों के अनुसार नीम के बीज कडवे और कपफ निस्तारक हैं जिनका प्रयोग पेट में बढी हुई तिल्ली के उपचार में किया जाता है। हृदय रोगों में भी यह हितकारी है। रक्तस्रावरोधक, वमनकारक, नकसीर को रोकने वाला, दाँतों को मजबूत करने वाला, सूजन को मिटाता और गीली-सूखी खुजली को दूर करता है। इसके बीजों के तेल से मस्तिष्क की शक्ति बढती है। कर्णशूल को दूर करता है। मृदुविरेचक और रक्तशोधक कहा जाता है। बवासीर, तिल्ली, यकृत की विकृति तथा सूजन को मिटाता है। इसके पत्ते और फलों का प्रयोग करने से मूत्रा संबंधी रोग, )तु-स्राव में अनियमितता, स्नायविक, मस्तकशूल तथा सर्दी के शोध जैसी बीमारियाँ भागती बनती है। मुस्लिम देशों में भी इसकी उपयोगिता निरंतर बढती जा रही है। पारसियन हकीमों ने इसकी जानकारी भारत से हस्तगत की थी। पारसी लोगों का ऐसा अभिमत है कि इस वृक्ष की छाल, फल, पत्ते और पफल गरम और रूक्ष होते हैं। पत्तों और पफल का पुल्टिस व लेप लगाने से मस्तक का पफोडा जल्दी ठीक होता है। पंजाब में संधिवात की पीडा मिटाने हेतु नीम के बीजों का प्रयोग किया जाता है। हिमाचल में भी इसके बीजों का प्रयोग किया जाता है। हिमाचल म भी इसके बीजों का चूर्ण अन्यान्य औषधियों के साथ प्रयोग किया जाता तथा पुल्टिस के रूप में गठिया और संधिवात की पीडा को मिटाता है। अमेरिका में तो नीम की पत्तियों का काढा बनाकर हीस्टीरिया रोग को दूर करने में किया जाता है। इसकी छाल और पत्ते गलित कुष्ठ और कंठमाला के उपचार में काम आते है। पफलों की पुल्टिस में कृमिनाशक तत्व होने से चर्मरोग दूर होते है। इण्डोचायना में तो इसके पफलों का प्रयोग ज्वर और मूत्रा संबंधी रोगों को दूर भगाने में किया जाता है। पेट की बीमारियों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

नीम के औषधीय गुणों की सामान्य जानकारी

यह नीम के औषधीय गुणों की सामान्य जानकारी है किन्तु इसकी असीम शक्ति सामर्थ्य से कैसे लाभान्वित हुआ जाय सो इस प्रयोग विधि को समझना भी जरूरी है। बादी-बबासीर में नीम की छाल को सुखाकर ५०-६० ग्राम की मात्राा में १० ग्राम काली मिर्च मिलाकर प्रतिदिन निराहार ३ ग्राम की मात्राा पानी के साथ लें। स्तनों में खुजली होने पर नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर स्तनों को धोंये तत्पश्चात ताजे दुग्ध में थोडी सी मात्राा जैतून के तेल की मिलाकर मालिश करने से खुजली भी मिटती है और स्तनों में कठोरता भी आने लगती है। नारियल के तेल में नीम की पत्तियों का उबला हुआ पानी मिलाकर सिर में लगाने से जुंए नष्ट हो जाती है। नीम के २५ ग्राम ताजा फल पीसकर पानी में मिलाकर शर्बत की भांति १५ दिन तक पीने से घमौरियाँ समाप्त हो जाती हैं।

कभी-कभी दाँत की संधियों में पीप

कभी-कभी दाँत की संधियों में पीप पडने की शिकायत होती है। ऐसी स्थिति में नीम की पत्तियों को पीस कर ४ मिनट तक मसूडों की मालिश नियमित करें। दाद के ऊपर नीम के पत्तों को दही में पीसकर घाव पर लगाया जाय तो जल्दी भर जाता है। खुजली छूत का रोग है एक घर में एक को हुई तो सभी को होने लगती है। नीम के पत्तों को पानी में उबालकर पीने-लगाने से ठीक हो जाती है। मुँह के मुँहासों पर नीम की छाल घिस कर लगाने से लाभ मिलता है। नीम की दातुन करने से दाँत भी सापफ होते हैं और मुँह की दुर्गन्ध भी मिटती है। १०-१० ग्राम की मात्राा में नीम के पत्ते और तिल दोनों को पीसकर मालिश करने से चर्म रोग मिटता है। नीम की ५-७ पत्तियाँ प्रतिदिन चबाने से रक्त विकार दूर होते है।

हाथ पैरों में तपन महसूस होने पर

हाथ पैरों में तपन महसूस होने पर नीम के पंचांग को पीसकर हथेली और तलुओं पर लगाने से शिकायत दूर होती है। नवजात शिशु की अचानक मृत्यु होने पर स्तनों में से दूध निकल कर कपडे खराब करने लगता है नीम की निबोरी की गिरी पीसकर स्तनों पर लगाने से दूध स्वतः ही शुष्क हो जाता है। ५० ग्राम घी में २० ग्राम नीम की पत्तियों को भूनकर सेवन करने से काम वासना शांत होती है और रक्त सापफ होने से नपुंसकता भी मिटती है। हो सकता है शंकर जी ने कामदहन के प्रयोजन को पूरा करने के लिए नीम की पत्तियों का सेवन अवश्य किया होगा। २५० ग्राम नीम की छाल को कूटकर १ लीटर उबले पानी में रात भर भीगने दें। उसमें से थोडा काढा उपदंश रोगी को पिलायें और शेष से घावों को धोने से बीमारी मिटती है।

संतति निरोध के लिए

संतति निरोध के लिए क्वीनीन और कार्बोलिक एसिड के धोल का सेवन करने से शुक्राणु नष्ट होते है। नीम का तेल परिवार नियोजन की उत्तम औषधि है। प्रसव के समय प्रसूता को नीम की छाल का उबला हुआ गुनगुना पानी पिलाने पर प्रसव शीघ्र होता है। कई बार महिलाओं को मासिक धर्म के समय पीडा सताती है ऐसी स्थिति में नीम के पत्तों को गर्म करके नाभि के नीचे बांधने से तकलीपफ मिटती है। चेचक रोग बडा खतरनाक है। नीम का प्रयोग करने वालें को चेचक निकलती भी नहीं है। यदि निकल भी जाये तो उग्र रूप धारण नहीं करती। बाल झडने की बीमारी को रोकने के लिए नीम के पत्तों को सौ ग्राम पानी को उबालकर सिर धोने से लाभ होता है। असमय में बाल पकने के रोग में नीम की मींगी को भाँगरे के रस में घोंट कर एक सप्ताह तक सूखा लें। सुबह-शाम इसके तेल की तीन बूँदे नाक में डालने से बालों का पकना बंद होता है। मुँहासों को ठीक करने हेतु नीम की जड का छिलका उतार कर अंदर के भाग को पानी के साथ पत्थर पर घिस कर लगायें।

स्त्रिायों को मासिक धर्म में पीडा

स्त्रिायों को मासिक धर्म में पीडा होती है अथवा मासिक धर्म रुक-रुक कर आता है जिससे शरीर में भारीपन आने लगता है। जाँघों में दर्द होता है और बच्चा भी पेट में नहीं ठहर पाता उनको नीम की पत्तियों का ६ मि.ली. और अदरक का १० मि.ली. रस मिलाकर प्रतिदिन पिलायें तो आराम मिलता है। यदि मल के साथ छोटे-छोटे कीडे निकलने लगते हैं तो नीम के ताजे सूखे फलों को चने के बेसन में मिलाकर सरसों के तेल में पकोडी बना कर खिलाने से कृमि नष्ट हो जाते है।

पैर सूजन

व्यक्ति का एक पैर सूजकर हाथी के पैर जैसा मोटा हो जाता है १० नीम और १० तुलसी दोनों पत्तों को मिलाकर लेने से हाथी पाँव ठीक होने लगता है। थोडा मोम पिघला कर उसमें नीम का तेल मिलाकर बिवाई में लगाया जाये तो उनका पफटना बंद हो जाता है। चरक और सश्रुत का कथन है कि नीम की पत्तियों का स्वरस ३ से १० मि.ली. की मात्राा में रोजाना दो बार लगाने से कुष्ठ रोग मिटता है। कुष्ठ रोगियों को तो नीम के पेड के नीचे ही अपना आवास बना लेना चाहिए। प्रतिदिन नीम की १०-१५ कोंपले चबाने से रक्त स्वच्छ और त्वचा निर्मल रहती है। नीम की पत्तियों के लेप से पफोडे-फन्सी ठीक होते है। नासूर एक ऐसा पफोडा होता है जो शरीर के भीतर ही भीतर फलकर कैंसर की तरह समस्त शरीर को विषमुक्त बना देता है।

बुखार आने पर

ज्वर आने पर नीम की सींकें १० ग्राम और १० ग्राम काली मिर्च दोनों को पीसकर सुबह-सांय लेने से ज्वर उतर जाता है। पेट में पथरी होने पर नीम के पत्तों को छाया में सुखाकर बर्तन में जला लें। जलने पर एक बर्तन में ढक दें। चार घण्टे बाद पत्तियों को निकालकर पीस डालें। दिन में तीन बार ठंडे पानी के साथ ६ ग्राम फकी लगायें तो मूत्रााशय की पथरी गलकर बाहर आ जाती है। १ ग्राम नीम के बीज की गिरी को थोडी सी चीनी में पीसकर फकी लगाने से दस्त बंद हो जाते हैं।

सर्प के काट जाने से पहचान नीम बताता है

सर्प के काट जाने से पहचान नीम बताता है। यदि पत्तियाँ मीठी लगे तो विष शरीर में फला हुआ है। नमक और काली मिर्च मिलाकर नीम के पत्तों को चबाते रहने से विष का प्रभाव उतर जाता है।

सर्प दंश

सर्प काटने पर नीम की पत्तियॉं खानी चाहिए, इससे नींद नहीं आती व यह जहर भी नहीं लेती हैं।

आयुर्वेदाचार्यो का कहना है कि प्रतिदिन कोई व्यक्ति ५-७ नीम की पत्तियाँ चबाता रहे तो वह नीलकण्ठ बन जाता है। मधुमक्खी के काटने पर नीम की पत्तियाँ रगड लें। नीम के तेल को गर्म करके उसमें १६वाँ भाग मोम डालें। जब पिघल जाय तो आग पर से उतार कर ८वाँ भाग भुनी पिसी पिफटकरी मिलायें कान बहने पर उसको डालते ही लाभ मिलता है। पीलिया रोग में नीम की पत्तियों के रस १० ग्राम मधु मिलाकर ५-७ दिन लेने से रोग भागता है। निबौरियों के तेल की मालिश के पक्षाघात की बीमारी नहीं रहती। नीम के तेल को मामूली सा गर्म करके कान में प्रतिदिन डालने से बहरापन दूर होता है। २० ग्राम नीम की पत्तियों के रस में ५ काली मिर्च मिलाकर लेने से उल्टियाँ बंद हो जाती हैं। मलेरिया में ६० ग्राम नीम के हरे पत्तों में ५ काली मिर्च पीसकर १२५ मि.ली. पानी में छानकर पी लें। मधुमेह में नीम की छाल का काढा बडा उपयोगी होता है। निबौरी को सुरमा की भांति रात्रिा को सोते समय नेत्राों में लगाने से मोतियाबिन्दु का रोग नहीं रहता है। नीम की निबौरियों की गिरी को गर्म जल में पीने से विष खाने का प्रभाव मिटता है।

त्वचा रोगों में

खुजली, घमोरियां, एग्जीमा, सोराइसिस और कुष्ठ आदि त्वचा संबंधी रोगों में नीम की पत्तियों का लेप बनाकर लगाने से लाभ होता है।

डायबिटीज में

मरीज को सुबह खाली पेट 6-7 नीम की पत्तियां व 8-10 निंबोली खानी चाहिए इससे शुगर लेवल कम होता है।

पेट के लिए

गैस, अल्सर व पेट की अन्य समस्याओं के साथ टीबी व यूरिन इंफेक्शन होने पर नीम की पत्तियों को खाली पेट चबाने से आराम मिलता है। पेट की सफाई के लिए नीम के रस का अनीमा भी दिया जाता है। बसंत ऋतु में नीम की 3-4 कोमल पत्तियां चबाने से टायफॅाइड, चेचक व पीलिया जैसे संक्रामक रोग दूर होते हैं।

बालों के लिए

नीम की सूखी पत्तियां पीसकर मेहंदी, आंवला, रीठा, शिकाकाई में मिलाकर बालों में एक घंटा लगाकर धोने से बाल काले व मुलायम होते हैं और डेंड्रफ भी दूर होता है।

शैंपू में प्रयोग

लोहे के बर्तन में आंवला, रीठा, शिकाकाई, एलोवेरा के साथ नीम की पत्तियां 1-2 रात के लिए भिगोएं। इसके बाद उबालकर, छानकर व ठंडा करके शैंपू की तरह प्रयोग करें।

तेल में प्रयोग

लोहे के बर्तन में two hundred ग्राम नारियल या सरसों केे तेल में a pair of मुट्ठी नीम की पत्तियों का पेस्ट, आंवला, एलोवेरा और दानामेथी मिलाकर गर्म करें व ठंडा होने पर प्रयोग करें। हफ्ते में a pair of बार इस तेल से सिर में मालिश करें

कीटनाशक उपयोग

नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर नहाने से शरीर के कीटाणु दूर होते हैं। इन पत्तियो को फेंके नहीं, इनका पेस्ट बनाकर मुल्तानी मिट्टी, चंदन पाउडर और गुलाब जल के साथ 20-30 मिनट के लिए चेहरे पर लगाएं और फिर धो लें।

मच्छरों के लिए

एक मुट्ठी नीम की सूखी पत्तियों को गोबर के कंडे के साथ छोटे प्याले में जलाकर fifteen मिनट तक धुआं करें, इस दौरान परिवार के लोग बाहर चले जाएं। बाद में खिड़की दरवाजे खोल दें।

नीम का शैम्पू

नीम की निमोलियों को सुखा कर फोड़ कर मिगी निकाल लें। समान मात्रा में अरीठा मिला कर बहुत बारीक पीस लें। इस पाउडर की दो चम्मच एक गिलास गर्म पानी में घोल कर सिर धोयें। इससे सिर के जूँएँ, लीकें, सिर की दुर्गन्‍ध नष्ट हो जाती हैं। बाल काले और मुलायम हो जाते हैं।

दाद

नीम की गिली लकड़ी लें। इस लकड़ी को जलाए। जलाने पर इसमें से आस-पास से पानी निकलेगा। इस पानी को दाद पर लगायें। दाद ठीक हो जाएगी।

कब्ज

कब्ज दूर करने के लिए तथा विकार के लिए पकी हुई निबोनी नित्य चुसें।

फोडे, फुंसी

मार्च और अप्रैल में fifteen दिन भूखे पेट नीम की नई कोपलें और सेंधा नमक के साथ पीस कर खायें। रक्त साफ होकर फोड़े, फुुं सी नहीं होगें।

खसरा

खसरा के रोगी के बिस्तर पर नित्य नीम की पत्तियॉं रखें। यह रोगी की अंदरूनी गर्मी को शांत कर आराम देती हैं।

मासिक धर्म, दॉंत दर्द

नीम की कोपलें पानी में उबाल का पीयें। इससे दॉंत दर्द में आराम होता हैं। यह मासिक धर्म की अनियमितताओं में भी लाभदायक होती हैं।

कुष्ठ

नीम की मालिश करने से कुष्ठ रोग में लाभ होता हैं।

अर्धांगघात

जहॉं-जहॉं सुन्नता हो, वहॉं नीम के तेल की नित्य तीन सप्ताह मालिश करें।

सिर दर्द आधे सिर का

यदि आधे सिर का दर्द सूर्योदय से आरंभ हो कर पीस साथ समाप्त होता तो fifteen नीम की गहरी हरी पत्ती, five काली मिर्च और thirty चावल सब पीस कर, सूर्य उगने से पहले इसे सूँघें। आधे सिर का दर्द कम हो जाएगा।

आँव आना

यदि मल के साथ आँव आती हो तो नीम की हरी पत्तीयों को धोकर छाया में सुखा लें। फिर पीस लें। इसकी आधा चम्मच सुबह-शाम को खाने के बाद दो बार ठंडे पानी से इसकी फंकी लें। कुछ दिन लेते रहने से आॅव बंद हो जाता हैं।

कनफेड़

नीम की चार निबालियां सुबह-शाम को चबाने से लाभ होता हैं।

गले में दर्द

गला दु:खता हैं, जलन होती हैं, कफ जमा हुआ लगता हैं तो दो चम्मच नीम की पत्तियों का रस, एक गिलास गर्म पानी, आधा चम्मच शहद मिला कर नित्य दो बार गरारें करें।

गृधसी

बकायन के पत्तों का रस दो चम्मच एक रूप कप पानी मेंं मिलाकर नित्य दो बार कुछ दिन पीयें। बकायन की छाल की दु:खती हुई जगह मालिश करें।

यकृत रोग

30 ग्राम नीम के पत्ते एक गिलास पानी में तेज उबाल कर five चम्मच पानी हर तीन घंटे में नित्य पीयें यकृत संबंधी बिकार ठीक हो जायेंगे। मदिरा पीने से बिगड़ा हुआ यकृत इससे ठीक होता हैं। यह पेय ताकत भी देता हैं।

नकसीर

यदि गर्मी के कारण नकसीर आती हो तो दो चम्मच नीम की पत्तियों का रस आधा कप पानी में मिला कर नित्य दो बार पीने से नकसीर बंद हो जाती हैं।

निमोनिया

नीम की पत्तियों का रस हल्का-सा गर्म करके सीने पर मालिश करें।

मोच

नीम की पत्तियॉं और आधी गॉंठ हल्दी पीस कर सरसों के तेल में मिला कर गर्म करें। इससे मोच ग्रस्त अंग का सेक करके इसका लेप करके पट्टी बॉंधें।

आंख की बीमारी

नीम की हरी निबोली का दूध आंखों पर लगाने से रतौंधी दूर होती है। आंख में जलन या दर्द हो तो नीम की पत्ती कनपटी पर बांधने से आराम मिलता है। नीम के पत्ते का रस थोड़ा गुनगुना करके जिस ओर आंख में दर्द हो, उसके दूसरी ओर कान में डालने से लाभ होता है।

बालों की परेशानी

• नीम का तेल नियमित सर में लगाने से गंजापन या बाल का तेजी से झड़ना रूक जाता है। यह बालों को भूरा होने से भी बचाता है। नीम के तेल से हेयर ऑइल तथा हेयर लोशन भी बनाये जाते हैं। किन्तु नीम तेल या उससे बने साबुन, तेल, लोशन आदि लगाने से माथे में गर्मी भी होती है, अत: बहुत जरूरी होने पर ही इनका प्रयोग करना चाहिए।

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